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भगवद् गीता का परिचय
गीता एक गीत है । गीतों का गायन खुशी में होता है । पर हर खुशी में गाये जाने वाले गीत गीता नहीं है । गीता आध्यात्मिक ज्ञान का गीत है । ये गुरु और शिष्य के बीच संवाद है जो शिष्य को अखंड खुशी प्रदान करता है ।
वर्तमान युग में कुछ महान लोगों ने भी गीता की रचना की है जैसे गणपति मुनि कृत रमन्ना गीता जो रमण महर्षी की शिक्षा पर आधारित है । पर अधिकतर लोगों को भगवद् गीता के अतिरिक्त अन्य गीताओं की जानकारी नही है ।
भगवद् गीता कृष्ण एवं अर्जुन के मध्य संवाद पर आधारित है । यह इतनी अधिक प्रचलित हो गयी कि गीता शब्द से भगवद् गीता ही समझा जाता है ।
भगवद्गीता –( सार्वभौमिक मार्ग दर्शिका)Universal Life Guide Book
भगवद्गीता हमारे एवं आपकी समस्या के बारे में है । अधिकतर हम जिन प्रश्नों का उत्तर खोजतें है उनका उत्तर उसमें निहित है जैसे मैं कौन हूं? मैं कैसे खुश रह सकता हूं? मुझे कैसे गुस्से से छुटकारा मिल सकता है? उत्तेजक परिस्थितियों में मै कैसे शांत रह सकता हूं? ईश्वर ने यह संसार क्यूं बनाया ?मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है ?एवं उसे कैसे पा सकता हूं ?
गीता में प्रासंगिक विषयों पर चर्चा नहीं है जैसे बाल श्रमिक अथवा महिला शिक्षा इत्यादि, ये विषय वर्तमान में प्रासंगिक हैं । गीता में समय, स्थान अथवा परिस्थितियों के अपवाद सार्वभौमिक विषयों पर चिंतन है जो किसी जाति मत, धर्म,राष्ट अथवा संस्कृति पर निर्भर नही है ।
प्राचीन काल से अब तक जीवन शैली के परिवर्तन के बावजूद मनुष्य की शांति एवं खुशी की खोज में कोई परिवर्तन नही हुआ है । अपने सार्वंभौमिक स्वरूप के कारण भगवद्गीता सभी प्रकार के व्यवसाय एवं क्षेत्र के लिए उपयुक्त है । भगवद्गीता केप्रमुख विषय:-
प्रबन्धन की मार्ग दर्शक Management
व्यक्तिगत संबन्धों की पुस्तिका Personal relation ship
रहस्यमय लाभों का उद्घाटन Secrets to large benefits
मनुष्य निर्माणArt of Man making
गीता कर्म की व्यवाहरिक मार्ग दर्शन की पुस्तिका है
गीता के बारे में विभिन्न द्रष्टिकोण :
1. धर्म ग्रंथ:- अधिकतर हिन्दू एवं अन्य समुदायों के लिए गीता महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ है तथा इसकी पूजा की जाती है । ज्यादातर हिन्दू यह मानते हैं कि इसमें आध्यात्म ज्ञान है जो कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के समय दिया ।बहुत से घरों मे इसे धर्म प्रेरणा स्वरूप रोज पढ़ते हैं पर अघिकतर इसकी गहराई से अनभिज्ञ हैं ।
2. प्रमाण ग्रंथ:- पुरातन काल के आचार्य जैसे शंकराचार्य एवं रामानुजचार्य ने गीता को एक प्रमाणिक ग्रंथ के रूप मे देखा जो उनके अद्वैतएवं विशिष्टवेदांत को सत्यापित करती है । लोकमान्य तिलक ने जेल में इस पर समीक्षा लिख कर इसके मूल सत्य को जन जन तक पहुंचाने का प्रयत्न किया ।
3. आध्यात्मिक ज्ञान ग्रंथ:- जन समुदाय को शिक्षित करने हेतु संत ज्ञानेश्वर ने गीता पर रचनाएं कर इसके ज्ञान पर प्रवचन दिये । उनकी रचना ज्ञानेश्वरी आज भी हजारों लोग पढ़ते हैं जो मूल संस्कृत मे पढ़ और समझ नही सकते । विनोबा भावे के जेल प्रवास में अपने जेल साथीयों को दिये प्रवचनों का संकलन गीतयी नाम से प्रसिद्ध है।
4. भौतिक ज्ञान ग्रंथ:- अनेक वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक समाज शास्त्रीयों ने अपने विचारों का सत्यापन गीता में पाया ।ओपेनहेमर नामक प्रसिद्ध जर्मन ने प्रथम आणविक प्रयोग स्वरूप व्याख्या गीता में पायी जिस पर बहुत खोज हुई एवं अभी भी चल रही है ।अघ्याय 11.2 की उल्लेख:
दिवि सूर्यसहस्त्र भवेध्युगपदुत्थिता ।
यदि भा: सद्दशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मन: ।।
आकाश में हजारों सूर्यों के एक साथ उदय होने से उत्पन्न जो प्रकाश हो, वह भी उस विश्वरूप परमात्मा के प्रकाशके सदृश कदीचित् ही हो ।
5. मार्ग दर्शक ग्रंथ:- गीता मार्ग दर्शक रूप में सभी को कठिनाइयों के समय धैर्य प्रदान करती है । महात्मा गान्धी के शब्दों में “जब भी कोई व्यक्तिगत अथवा सामाजिक समस्या आती है मेरे सामने तब मैं गीता में उसका हल ढूढंता हूं एवं गीता ने मुझे कभी निराश नही किया ।गुरुदेव स्वामी चिन्मयानन्द जी ने भी इसे मानव निर्माण एवं आत्मावलोकन की निर्देशिका के रूप मे व्याख्या की ।


